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    अपराधी किशोर को जेल में नहीं रखा जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट"




    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि अपराध के आरोपी नाबालिग को जेल में तब तक नहीं रखा जा सकता जब तक वह 21 वर्ष का न हो जाए। कोर्ट ने कहा कि जैसे ही आरोपी किशोर होने का दावा करता है, उसकी आयु का निर्धारण आवश्यक है और उसके बाद उसे जेल की बजाय बाल संरक्षण गृह में रखा जाना चाहिए।मामला प्रयागराज के थरवई थाने से जुड़ा है, जहां 2017 में पवन कुमार पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद चार्जशीट दाखिल हुई और आरोप तय कर दिए गए। ट्रायल के दौरान पवन ने अपराध के समय किशोर होने का दावा किया। आयु जांच में वह केवल 14 साल 3 महीने 19 दिन का निकला। किशोर न्याय बोर्ड ने इसी वर्ष मई में उसे किशोर घोषित कर रिहाई का आदेश दिया, लेकिन उसे जेल में ही रखा गया।न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति संदीप जैन की खंडपीठ ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किशोर को जेल में रखना कानून के खिलाफ है। कोर्ट ने नैनी जेल अधीक्षक को पवन कुमार को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया और पुलिस कमिश्नर को ट्रायल कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया ताकि उसकी सही आयु का निर्धारण धारा 9(2) के तहत किया जा सके।कोर्ट ने यह भी कहा कि किशोर बंदी से जमानत मांगने का औचित्य नहीं बनता, क्योंकि नाबालिग पर आपराधिक अदालत में मुकदमा ही नहीं चलाया जा सकता।

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